Magazine website header
  • प्रवासी हिंदी : इतिहास, स्वरूप एवं समस्याएँ
    (लेख)   रचनाकार: डॉ. विमलेश कान्ति वर्मा
    भारतीय आप्रवासन का इतिहास कम से कम पंद्रह सौ वर्ष पुराना है और इस भारतीय आप्रवासन को हम तीन प्रमुख चरणों में बाँट कर देख सकते हैं। भारतीय आप्रवासन के पहले चरण का प्रारम्भ उस समय से मानना चाहिए जब राजस्थान, गुजरात तथा पंजाब प्रांत के बंजारे अपनी यायावरी प्रवृत्ति के कारण भारत छोड़कर बाहर निकले और यूरोप, अमेरिका होते हुए वे सारे विश्व में फैल गए।
  •  
  • विश्वभाषा हिंदी : व्याप्ति एवं स्वीकृति
    (लेख)   रचनाकार: डॉ. रणजीत साहा
    बावजूद कठिनाइयों के, हिंदी की संघर्ष यात्रा अपनी समस्त गतिविधियों के साथ अबाध आगे बढ़ती रही। इस गतिशील यात्रा में, हिंदी की दर्जनों समर्पित संस्थाएँ - चाहे वे उत्तर भारत की हों या दक्षिण भारत की, निरंतर सक्रिय बनी रहीं।
  •  
  • भारत और उज़्बेकिस्तान के साहित्यिक संबंधों के विकास की समस्याएँ
    (लेख)   रचनाकार: प्रो. तमरा खोदजायेवा
    सन् 1991 से जब उज़्बेकिस्तान स्वतंत्र राष्ट्र बन गया है, दोनों देशों के साहित्यिक संबंधों को और विस्तार देने के नये रास्ते और नयी संभावनाएँ खुलती जा रही हैं। इस दिशा में ताशकन्द में भारतीय राजदूतावास और भारत का सांस्कृतिक केंद्र महत्त्वपूर्ण योजनाएँ अमल में ला रहे हैं।
  •  
  • वैश्विक हिंदी और भारतीय संस्कृति
    (लेख)   रचनाकार: प्रो. खेमसिंह डहेरिया
    वैश्वीकरण और भारत के बढ़ते प्रभाव के साथ हिंदी के प्रति विश्व के लोगों में रूचि बढ़ी है। दूसरे देशों के साथ बढ़ता प्रभाव भी इसका एक कारण है, हिंदी विश्व के लगभग डेढ़ सौ विश्वविद्यालयों में पढ़ी और पढ़ाई जा रही है। विभिन्न देशों के 91 विश्वविद्यालयों में ‘हिंदी चेयर’ है।
  •  
  • रामायण से निःसृत लोकगीत
    (लेख)   रचनाकार: श्रीमती नर्वदा खेदना
    ‘श्री रामचरितमानस’ से मॉरीशस टापू का बहुत गहरा सम्बन्ध है। मॉरीशस जिसकी उपमा अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन ने स्वर्ग से की थी, यह निस्संदेह इसलिए, क्योंकि मॉरीशस संस्कारों की धरती है। यहाँ हर कौम के लोग, हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सभी एक-दूसरे के पर्व-त्योहारों में समान रूप से भाग लेते हैं, फिर, चाहे वह दीपावली, ईद या क्रिस्मस हो।
  •  
  • भारतीय संस्कृति : जीवन विवेक की साहित्यिक परम्परा
    (लेख)   रचनाकार: डॉ. आनन्द कुमार सिंह
    रामायण और महाभारत ये दोनों महाकाव्य हमारी भारतीय संस्कृति को रचते हैं। हम देखते हैं कि इन काव्यों में मनुष्य के संघर्ष पक्ष और सिद्धि पक्ष को किस तरह से वाल्मीकि और व्यास जी ने उठाया है और उनके भीतर से ही अपने चरित्रों की सृष्टि की है।
  •  
  • रेडियो प्रसारण की भाषा
    (लेख)   रचनाकार: अरुण कुमार पाण्डेय ‘अभिनव अरुण’
    रेडियो प्रसारण कई अर्थों में भिन्न है। एक ओर जहाँ टेलीविजन अथवा कोई भी दृश्य माध्यम चाहे वह मोबाइल ही क्यों न हो, वह आपका सम्पूर्ण ध्यान चाहता है, जबकि आप रेडियो प्रसारण से अपने अन्य उपक्रमों में रत रहते हुए भी इसका लाभ ले सकते हैं।
  •  
  • ऑनलाइन शिक्षण : कोरोना संकट में आशा की एक किरण
    (लेख)   रचनाकार: रोहित कुमार 'हैप्पी'
    भारतीय शिक्षा प्रणाली में विस्तृत रूप से ऑनलाइन शिक्षण एक नया प्रयोग है। भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। शिक्षण को क्रियाशील रखने के लिए ‘ऑनलाइन शिक्षण पद्धति’ से कोरोना संकट में एक आशा बंधती है।
  •